Monday, September 24, 2018
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100 रुपए में बनवाइए पतंजलि का स्‍वेदशी समृद्धि कार्ड, 10% कैशबैक के साथ 5 लाख की सुरक्षा

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100 रुपए में बनवाइए पतंजलि का स्‍वेदशी समृद्धि कार्ड, 10% कैशबैक के साथ 5 लाख की सुरक्षा

कंपनी अपना नया ‘स्‍वेदशी समृद्धि कार्ड’ (swadeshi samriddhi card)  लेकर आई है। किसी भी आम डेबिट और क्रेडिट कार्ड की तरह दिखने वाले स्‍वेदशी समृद्धि कार्ड के जरिए पतंजलि के प्रोडक्‍ट खरीदने पर 10 फीसदी तक कैशबैक मिलेगा। साथ ही कार्डधारक के परिवार को किसी दुर्घटना में मौत होने की स्थिति में 5 लाख रुपए तक का बीमा कवर भी मिलेगा। कंपनी का यह कार्ड कोई भी हासिल कर सकता है। इसकी फीस मात्र 100 रुपए है। कार्ड की बुकिंग शुरू हो चुकी है। इसके लिए आपको एक प्रॉसेस फॉलो करना होगा। आइए जानते हैं इस कार्ड के बारे में और आखिर इसे कैसे हासिल किया जा सकता है…

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क्‍या है ?

पतंजलि स्‍वदेशी समृद्धि कार्ड एक तरह का शॉपिंग कार्ड है। शॉपिंग करने के लिए आपको इस कार्ड में टॉपअप या रीचार्ज करना होगा। इसके जरिए पतंजलि के किसी भी मेगा स्‍टोर, चिकित्‍सालय या आरोग्‍य केंद्र से अगर आप खरीददारी करेंगे तो कंपनी आपको 10 फीसदी तक का कैशबैक और 5 लाख रुपए का फ्री बीमा कवर मुहैया कराएगी। एग्‍जीक्‍यूटिव के मुताबिक, यह एक तरह का शॉपिंग डेबिट कार्ड होगा।

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कार्ड रखने के क्‍या क्‍या फायदे 
पतंजलि के प्रोडक्‍ट खरीदने पर आपको 10 फीसदी तक कैशबैक मिलेगा। आपके खर्च और परचेज के हिसाब से आपको 5 से 10 फीसदी के बीच कैशबैक दिया जाएगा। कार्ड के लिए पतंजलि ने swadeshisamridhi.com वेबसाइट की शुरुआत की है। इस पर दी गई जानकारी के मुताबिक, कार्ड के साथ आपको 5 लाख रुपए का बीमा कवर भी मिलेगा। पतंजलि का यह भी दावा है कि इससे होने वाले सारे प्रॉफिट को वह धर्मार्थ कार्यों में खर्च करेगी। 5 लाख का कवर और 10 फीसदी का कैशबैक पाने के लिए कुछ नियम और शर्तों का भी पालन करना होगा।

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कैसे मिलेगा कार्ड 
आप यह कार्ड ऑन लाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से हासिल कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए आपको पतंजलि स्‍वदेशी समृद्धि कार्ड की आधिकारिक वेबसाइट swadeshisamridhi.com पर जाना होगा। यहां आप बाय योर कार्ड के ऑप्‍शन पर क्लिक करके खुद को रजिस्‍टर करें। यहां आपको एक रजिस्‍ट्रेशन आईडी मिलेगी। इसे लेकर किसी भी पतंजलि मेगा स्‍टोर, चिकित्‍सालय या अरोग्‍य केंद्र जाएं। यहां ये आपको कार्ड मिल जाएगा। इसके लिए आपको 100 रुपए के साथ अतिरिक्‍त टैक्‍स का भी भुगतान करना होगा।

ऐसे मिलेगा 10 फीसदी तक का कैशबैक 

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आप पतंजलि स्‍वदेशी समृद्धि कार्ड के जरिए पतंजलि के प्रोडक्‍ट पर 10 फीसदी तक का कैशबैक हासिल करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कुछ नियम और शर्तों का पालन करना होगा। अगर आप कार्ड में एक बार में 4000 रुपए तक का टॉपअप करते हैं तो पतंजलि आपको 5 फीसदी का कैशबैक देगी। यानी 200 रुपए का कैशबैक आपको मिलेगा। अगर आप 4001 रुपए या इससे ज्‍यादा का टॉपअप करते हैं तो आपको 7 फीसदी का कैशबैक दिया जाएगा। किसी स्‍टोर से 5001 रुपए या इससे ज्‍यादा की खरीददारी करने पर 3 फीसदी की एक्‍स्‍ट्रा छूट जाएगी। यानी अगर आपने कार्ड में 5001 रुपए का टॉपआप किया और उतने की ही खरीददारी की तो 7+3 यानी 10 फीसदी का लाभ मिलेगा।

एक दिन में 9999 रुपए से ज्‍यादा की शॉपिंग नहीं 

कंपनी की ओर से कार्ड मुफ्त नहीं दिया जाएगा। इसके लिए आपको 100 रुपए की फीस चुकानी होगी। पहला टॉपअप कम से कम 500 रुपए का होना चाहिए। कार्ड के जरिए आप एक दिन में 9999 रुपए से ज्‍यादा की शॉपिंग नहीं कर सकते हैं। एक महीनें में आपको 50,000 रुपए से ज्‍यादा के टॉपअप की इजाजत नहीं होगी। कैशबैक की लिमिट भी निर्धारित है। महीने में आप एक कार्ड पर 1000 रुपए से ज्‍यादा का कैशबैक हासिल नहीं कर सकते हैं।

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स्वदेशी और विदेशी उत्पाद

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स्वदेशी और विदेशी उत्पादों की सूची ।

दन्त मंजन / पेस्ट :

स्वदेशी:: विको वज्रदंती, बैद्यनाथ, चोइस, नीम, डाबर , एंकर, मिस्वाक, बबूल, प्रोमिस, दन्त कांति दन्त मंजन।

विदेशी :: अधिकतर दन्त पेस्ट हड्डियों के पावडर से बनते है, जेसे कोलगेट, हिंदुस्तान यूनिलीवर ( पहले हिन्स्तान लीवर ), क्लोस-अप, पेप्सोडेंट, एम, सिबाका, एक्वा फ्रेश, एमवे, ओरल बी, क्वांटम आदि ।

दन्त ब्रश ( दन्त साफ करने का उपकरण ) :

स्वदेशी :: प्रोमिस, अजय, अजंता, मोनेट, रोयल, क्लास्सिक, डोक्टर स्ट्रोक ।

विदेशी :: कोलगेट, क्लोस-अप, पेप्सोडेंट, सिबाका, अक्वा फ्रेश, ओरल-बी, हिंदुस्तान लीवर ।

स्नान करने का साबुन ::

स्वदेशी:: निरमा , मेडिमिक्स, नीम्, नीमा, जस्मीन, मेसोर सेंडल, कुटीर, सहारा, पार्क अवेन्यु, सिंथोल, हिमानी ग्लिसरीन, फिर फ्लो, न १, शिकाकाई, गंगा, विप्रो, संतूर, काया कांति, काया कांति एलो वेरा ।

विदेशी :: हिंदुस्तान यूनिलीवर, लो’ ओरीअल , लाइफ ब्वाय ( कोई डर नहीं ) , ले सेंसि, डेनिम, चेमी, डव, रेविओं, पिअर्स, लक्स, विवेल, हमाम, ओके, पोंड्स, क्लिअर्सिल, पमोलिवे, एमवे, जोनसन बेबी, रेक्सोना, ब्रिज , डेटोल ।

शेम्पू, ( बाल धोने के लिए )::

स्वदेशी:: विप्रो, पार्क अवेन्यु, स्वस्तिक, आयुर, केश निखर, हेअर एंड केअर, नैसिल, अर्निका, वेलवेट, डाबर, बजाज, नेल, लेवेंडर, गोदरेज, वाटिका ।

विदेशी:: हेलो, कोलगेट, पामोलिव, हिंदुस्तान यूनिलीवर, लक्स, क्लिनिक प्लस, रेव्लों, लक्मे, पी एंड जी , हेड एंड शोल्डर, पेंटीन, डव, पोंड्स, ओल्ड स्पेस, शोवर तो शोवर, जोहानसन बेबी ।

कपडे / बर्तन धोने का पावडर::

स्वदेशी::टाटा शुद्ध, नीमा, सहारा, लो’ ओरीअल , निरमा, स्वस्तिक, विमल, हिपोलिन, देना, ससा, टी सीरिज, डोक्टर देत, घडी डिटर्जन, गेंतिल, उजाला, रानिपल, निरमा, चमको, दीप

विदेशी :: हिंदुस्तान यूनिलीवर, सर्फ़, रीन, सनलाईट, व्हील, विम, अरिअल, टाइड, हेंको, रेविअल, एमवे, क्वांटम, वुल्वाश, इजी, रोबिन ब्लू, टिनापोल, स्काईलार्क

दाढ़ी / शेविंग बनाने की क्रीम::

स्वदेशी:: पार्क अवेन्यु, प्रिमीअम, वि जोन, लो’ ओरीअल , इमामी, बलसारा, गोदरेज

विदेशी ::ओल्ड स्पाइस, पामोलिव, पोंड्स, जिलेट, एरास्मिक, डेनिम, यार्डली

दाढ़ी / शेविंग पत्ती / ब्लेड ::

स्वदेशी:: टोपाज, गेलंत ( gallant), सुपरमेक्स, लसर, एस्क्वेर, सिल्वर प्रिंस, प्रिमिअम

विदेशी ::जिलेट, सेवन ‘ओ’ क्लोक, एरास्मिक, विल्मेन, विल्तेज आदि

क्रीम / पावडर::

स्वदेशी:: बोरोसिल, आयुर, इमामी, विको, बोरोप्लस, बोरोलीन, हिमामी, नेल, लावेंदर, हेअर एंड केअर, निविय, हेवन्स, सिंथोल, ग्लोरी, वेलवेट (बेबी)

विदेशी ::हिंदुस्तान यूनिलीवर, फेअर एंड लवली, लक्मे, लिरिल, डेनिम, रेव्लों, पी एंड जी, ओले, क्लिएअर्सिल, क्लिएअर्तोन, चारमी, पोंड्स, ओल्ड स्पाइस, डेटोल ( ले १००% श्योर) , जॉन्सन अँड जॉन्सन

वस्त्र रेडीमेड::

स्वदेशी:: केम्ब्रिज, पार्क अवेन्यु, ओक्जेम्बर्ग ( ओक्सेम्बेर्ग) बॉम्बे डाइंग, रफ एंड टफ, ट्रिगर, किलर जींस, पिटर इंग्लेंड, डीजे अँड सी ( DJ&C ) ये हमारी ही मानसिकता है की हमारी कंपनिया हमें लुभाने के लिए अपने उत्पादों का विदेशी नाम रखती है ।

विदेशी ::व्रेंग्लर, नाइकी, ड्यूक, आदिदास, न्यूपोर्ट, पुमा आदि

घड़ियाँ::

स्वदेशी:: एच एम टी, टाइटन, मेक्सिमा, प्रेस्टीज, अजंता आदि

विदेशी ::राडो, तेग हिवर, स्विसको, सेको, सिटिजन, केसिओ

पेन पेन्सिल :::

स्वदेशी::शार्प, सेलो, विल्सन, टुडे, अम्बेसेडर, लिंक, मोंतेक्स, स्टिक, संगीता, लक्जर, अप्सरा,

विदेशी ::कमल, नटराज, किन्ग्सन, रेनोल्ड, अप्सरा, पारकर, निच्कोल्सन, रोतोमेक, स्विसएअर , एड जेल, राइडर, मिस्तुबिशी, फ्लेअर, यूनीबॉल, पाईलोट, रोल्डगोल्ड

पेय::

स्वदेशी::दुग्ध, लस्सी, ताजे फलों के रस, निम्बू पानी,नारियल का पानी, मिल्कशेक, ठंडाई, जलजीरा, रूह अफजा, रसना, फ्रूटी, एपी फ़िज़, ग्रेपो, जम्पिं, शरबत , डावर्स , एलएमएन, जलानी जलजीरा आदि

विदेशी ::( एक घंटे में चार कोल्ड ड्रिंक पिने से मृत्यु निश्चित है ) धीमा जहर कोका कोला, पेप्सी, फेंटा स्प्राईट, थम्स-अप, गोल्ड स्पोट, लिम्का, लहर, सेवन अप, मिरिंडा, स्लाइस, मेंगोला, निम्बुज़ आदि

चाय काफी::

स्वदेशी:: टाटा, ब्रह्मपुत्र, असम, गिरनार, वाघ बकरी, दिव्य पेय,शान ए पंजाब

विदेशी ::लिप्टन, टाइगर, ग्रीन लेबल, येलो लेबल, चिअर्स, ब्रुक बोंड रेड लेबल, ताज महल, गोद्फ्रे फिलिप्स, पोलसन, गूद्रिक, सनराइस, नेस्ले, नेस्केफे, रिच , ब्रू आदि

शिशु आहार एवं दूध पावडर::

स्वदेशी::शहद, डाल पानी, उबले चावल, तजा फलों का रस, अमूल, इंडाना, सागर, तपन, मिल्क केअर

विदेशी ::नेस्ले, लेक्टोजन सेरेलेक, एल पी ऍफ़, मिल्क मेड, नेस्प्रे, ग्लेक्सो, फेरेक्स

कुल्फी / आइसक्रीम ::

स्वदेशी:: घर की बनी कुल्फी, अमूल, वाडीलाल, दिनेश, हवमोर, गोकुल, दिनशा, जय , पेस्तोंजी

विदेशी :: वाल्स, क्वालिटी, डोलोप्स, बास्किन एंड रोबिनस, केडबरी.. अधिकतर आइसक्रीम में जनवरी की आंतो की परत होती है

नमक ::

नमक हमेशा सैंधा ही खाना चाहिए ये बीमारियो से दूर रखता है बी पी आदि बीमारिया नही लगतीस्वदेशी::टाटा, अंकुर , सूर्य, ताजा, तारा, निरमा, सेंधव नमक.

विदेशी :: अन्नपुर्णा , आशीर्वाद आटा, केप्टन कुक, हिंदुस्तान लीवर , किसान, पिल्सबरी आदि

नमकीन / स्नेक्स / चिप्स::

स्वदेशी::बीकाजी, बिकानो, हल्दीराम, बालाजी, हिपो , पार्ले, A1, गार्डन आदि

विदेशी ::अंकल चिप्स, पेप्सी, रफेल्स, होस्टेस, फन्मच, कुरकुरे, लेज आदि

टमाटर सौस, चटनिया, फ्रूट जेम::स्वदेशी::घर के बने हुए चटनिया, इंडाना, प्रिया, रसना, फ्रूट जाम, टिल्लूराम , मनोज, सिल, निलंस, रसना, कर्नल, पंतजलि

विदेशी ::नेस्ले, ब्रुक बोंड, किसान, हेंज, फिल्ड फ्रेश, मेगी सौस

चोकलेट / दूध पावडर::

अधिकतर चोकलेट में अर्सेलिक जहर मिला होता हैस्वदेशी:: गुड के साथ मूंगफली या बादाम लाभप्रद है, पार्ले, बेक्मंस, क्रिमिचा, शंगरीला, इंडाना, अमूल, रावलगाँव

विदेशी :: केडबरी, बोर्नविटा , होर्लिक्स, न्यूट्रिन, विक्स, मिल्किबर, इक्लेअर्स , मंच, पार्क, डेरिमिल्क, बोर्नविले, बिग बबल, एलपेनलिबें, सेंटरफ्रेश, फ्रूट फ्रेश, परफीती आदि

रेडीमेड खाना ::

स्वदेशी::घर का खाना, हाथो से बनाया हुआ

विदेशी ::मेगी, हेंज, नौर , डोमिनोज, पिज्जा हट , फ्रिन्तो-ले , के एफ़ सी

पानी::

स्वदेशी::घर का उबला हुआ पानी, बिसलेरी, हिमालय, रेल नीर, यस, गंगा आदि

विदेशी ::एक्वाफिना, किनली, बिल्ले, पुरे लाइफ, एवियन, सेन पिल्ग्रिमो, पेरिअर आदि

शक्तिवर्धक::

स्वदेशी:: च्यवनप्राश सबसे उत्तम ८०% तक , न्युत्रमुल, अमृत रसायन, बादाम पाक. आदि

विदेशी ::बूस्ट, पोलसन, बोर्नविटा, होर्लिक्स, प्रोतिनेक्स, स्प्राउट्स, कोमप्लैन

इलेक्ट्रोनिक्स वस्तु ::

स्वदेशी:: ओनिडा, बी पी एल, विडियोकोन, अकाई ( आज कल नाम सुनने को नहीं मिलता ) , टी- सीरिज , सलोरा, वेस्टर्न, क्रोवन, टेक्सला, गोदरेज उषा, ओरीअंट, खेतान, पी एस पी औ, बजाज, सिन्नी, शंकर, टी-सीरिज, क्राम्पटन,

विदेशी ::सोनी, फिलिप्स, हुंदा , सेन्सुई, शार्प, एलजी, देवू , सेन्यो, नेशनल पेनासोनिक केनवुड, थोमसन, सेमसंग, हिताची, तोशिबा, कोनिका, पयोनिअर, केल्विनेटर, वर्ल्फुल, इलेक्ट्रोलक्स आई ऍफ़ बी, हायर सिंगर, महाराजा, जी इ, रेलिमिक्स, केनस्टार, मृत, ब्रोउन, नेशनल, फिलिप्स

मोबाइल फ़ोन / सेवाए ::

स्वदेशी::मेक्स, ओनिडा, माइक्रोमेक्स, उषा-लक्सस, अजंता, ओर्पट, आइडिया, एअरटेल, रिलाइंस, टाटा इंडिकोम, एमटीएनएल, लूप, कार्बन, लावा, लेमन, भारती बीटल

विदेशी ::नोकिया, फ्लाई, मोटोरोला, एचटीसी, सोनी एरिक्सन, एसर, वर्जिन, वोडाफोन, एम टी एस , एल जी, सेमसंग, हायर, डॉकोमो आदि

खाद्य तेल ::

स्वदेशी:: सरसों का तेल , कच्ची घानी का तेल,

विदेशी ::डालडा ब्रांड, आई टी सी ब्रांड, हिंदुस्तान यूनिलीवर ब्रांड, फिल्ड फ्रेश ब्रांड के सभी वस्तुओ का बहिष्कार करे

कंप्यूटर::

स्वदेशी:: एच सी एल, विप्रो

विदेशी ::तोशिबा, एसर, एच पी, डेल, लिनोवो, सेमसंग, सोनी, आई. बी. एम. कोम्पेक आदि

दुपहिया वाहन::

स्वदेशी::हीरो, बजाज ( बजाज स्कूटर के बारे में सबको पता है, एक्टिवा से कड़ी टक्कर मिलने के कारण बजाज स्कूटर की जगह एक्टिवा दीखता है हमारी सडको पर,) टी वि एस, महिंद्रा, काइनेटिक

विदेशी ::कावासाकी, होंडा, हुंडई, एक्टिवा, इटरनो, रोयल एनफील्ड, हर्ली डेविडसन, स्प्लेंडर , पेशन

वाहन ::

स्वदेशी::लेंड रोवर, जगुआर, इंडिका, नेनो, टाटा मेजिक, बोलेरो, सुमो, सफारी, प्रेमिअर, अम्बसेदर, अशोक लेलेंड, स्वराज, महिंद्रा ट्रेक्टर, जाइलो, रेवा, अतुल, टी.व्ही.एस

विदेशी :: हुंडई, सेंट्रो, वोल्सवेगन, मर्सडीज, टोयोटा, निसान, स्कोडा, रोल्स रोयस, फेंटम, फोर्ड, जनरल, शेर्वोलेट, जोन डिअर, मारुति सुजुकी, लोगन

बैंक ::

स्वदेशी::इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ़ बड़ोदा, बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, आई डी बी आई, केनरा बैंक, सेन्ट्रल बैंक, देना बैंक, कोर्पोरेशन बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसिस बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सिंडिकेट बैंक, युको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, युनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया, विजया बैंक, आंध्र बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, कोटक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, यस बैंक, इडुसलेंड बैंक, धनलक्ष्मी, बैंक, सारस्वत बैंक, फेडरल बैंक, आई एन जी वैश्य बैंक, करुर वैश्य बैंक, कर्नाटका बैंक , लक्ष्मी विलाश बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर, साउथ इंडियन बैंक, नैनीताल बैंक आदि

विदेशी :: बैंक एचडीएफसी (HDFC), आई.सी.आई.सी.आई ( ICICI ), एबीएन एमरो, अबू धाबी बैंक, बीएनपी परिबास, सिटी बैंक, डच बैंक (Deutsche Bank), एच इस बी सी (HSBC), जे पि मोर्गन, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, तयब बैंक, स्कोटिया बैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक, एंटवर्प बैंक, अरब बंगलादेश, बैंक ऑफ़ अमेरिका, बहरीन कुवैत, टोक्यो मित्सुबिशी बैंक, बार्कले बैंक, चाइना ट्रस्ट, क्रुंग थाई बैंक, सोनाली बैंक, शिन्हन बैंक, ओमान इंटरनेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ मौरिशश, डी बैंक ऑफ़ न्युयोर्क, ऑस्ट्रेलियन बैंक, फोर्टिस बैंक, कोमन वेल्थ बैंक, रोयल बैंक ऑफ़ कनाडा, अमीरात बैंक, जर्मन बैंक,

जूते / चप्पल ::

स्वदेशी::लिबर्टी, लखानी, स्काई, भारत लेदर, एक्शन, रिलेक्सो, पेरगोन, पोद्दार, वाइकिंग, बिल्ली, कार्नोबा, डीजे अँड सी ( DJ&C ), बफेलो, रिग,वुडलैंड

विदेशी ::पुमा, बाटा, पॉवर, बीएमसी, एडीडास, नाइकी, रिबोक, फीनिक्स, लाबेल, चेरी ब्लोसम, कीवी, ली कूपर, रेड चीफ, कोलंबस

ध्यान दें !!!
ऐसी विदेशी कंपनियाँ भी है जिसमे आधे से भी कम % भारतीय पैसा लगा हुआ है तो वे भी विदेशी हुई, इसी तरह भारतीय कंपनी मे विदेशी ५०% से ज्यादा पैसा लगा है तो वह विदेशी है,
आप यह पता भी लगाए की आप जिस कंपनी का माल खरीद रहे है है क्या वह पूर्णतया स्वदेशी है ?
आप ज्यादा से ज्यादा छोटे दुकानदारो से समान खरीदे माल स्टोर से न खरीदे..!!
ये जरूरी नहीं की बिग बाजार कुछ विदेशी ब्रांड को अपने मॉल / ब्रांड के तले बेचता हो तो वे स्वदेशी है !

एक करोड़ पौधे लगाने वाले

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रमैया दरिपल्‍ली, तेलंगाना के खमाम जिले के रेड्डीपल्‍ली गांव के रहने वाले हैं. रमैया अब तक एक करोड़ से अधिक पौधे लगा चुके हैं और अब भी लगाते ही जा रहे हैं. पेड़-पौधे उनकी जिंदगी हैं पर कभी ये जुनून उनके लिए परेशानी का सबब बन गया था. एक समय ऐसा भी था जब लोगों ने उन्‍हें ‘पागल’ कहना शुरू कर दिया था. आज वही लोग उनका गुणगान करते नहीं थक रहे.

रमैया केवल दसवीं कक्षा तक ही पढ़े हैं. पर अगर उन्‍हें पौधों से सबंधित कोई भी किताब मिल जाए तो उसे पूरा पढ़ते हैं. बता दें कि उन्‍हें एकेडमी ऑफ यूनिव‍र्सल ग्‍लोबल पीस ने डॉक्‍टरेट की उपाधि दी है. उनके इलाके में उन्हें ‘Tree Man’ के नाम से भी जाना जाता है.

 

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सबसे बड़ा दानवीर

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सबसे बड़ा दानवीर – पालम कल्याणसुन्दरम

Tirunelveli के रहने वाले पालम कल्याणसुन्दरम तो ना जाने किस मिट्टी के बने हैं, उन्होंने लगातार तीस साल तक, हर महीने मिलने वाली अपनी पूरी सैलरी दान में दे दी…जी हाँ पूरी की पूरी सैलरी!

आइये आज हम उस महान सख्श की कहानी जानते हैं-

  • जो शायद दुनिया का पहला और अकेला इंसान है जिसने अपनी सारी कमाई दान में दे दी
  • जिसे सुपर स्टार रजनीकांत अपने पिता के रूप में अडॉप्ट कर चुके हैं
  • जिसे यूनाइटेड नेशंस ने 20th century के outstanding लोगों में शुमार किया है
  • जिसे अमेरिका की एक संस्था, “Man of the Milennuim” award दे चुकी है
  • जिससे अमेरिका के भूतपूर्व राष्टपति Mr. Bill Clinton, अपनी भारत यात्रा के दौरान मिलना चाहते थे
  • जिसे भारत सरकार ने “Best Librarian of India” माना है, और
  • जिसे `The International Biographical Centre, Cambridge ने ‘one of the noblest of the world’ का सम्मान दिया है

 

स्कूल की पढाई ख़त्म हो जाने के बाद, कल्याणसुन्दरम जी ने तमिल विषय में BA degree लेने का निश्चय किया। लेकिन चूँकि इस subject को opt करने वाले वो अकेले व्यक्ति थे इसलिए St. Xavier’s College के मैनेजमेंट ने उन्हें कोई और सब्जेक्ट लेकर पढने को कहा, लेकिन उन्होंने मन कर दिया।

जब MTT Hindu College के फाउंडर Karumuttu Thygaraja Chettiar को ये पता चला तो उन्होंने ना सिर्फ उन्हें उनके पसंदीदा कोर्स में एडमिशन दिया बल्कि उनकी पढाई का खर्च भी उठा लिया।

 

BA करने के बाद कल्याणसुन्दरम जी ने साहित्य और इतिहास में MA degree हासिल की और लाइब्रेरी साइंस की भी पढाई पूरी की, जिसमे वे गोल्ड मेडलिस्ट रहे। शायद आपको जानकार आश्चर्य हो की पालम कल्याणसुन्दरम जी दुनिया के 10 सबसे अच्छे लाइब्रेरियन में भी गिने जाते हैं

 

गरीब, अनाथ, बेसहारा बच्चों की पीड़ा देख कर कल्याणसुन्दरम जी का ह्रदय पिघल उठता था, इसलिए उन्होंने पढाई करते समय ही ऐसे बच्चों की मदद करने के लिए International Children’s Welfare Organisation नाम से एक संस्था बनायी। इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली, संभवतः यह संस्था कुछ समय बाद बंद हो गयी। हालांकि, उनका ऐसा करना दर्शाता है कि मानवता की सेवा के बीज उनके अन्दर शुरू से ही थे।

1962 में कल्याणसुन्दरम जी मद्रास यूनिवर्सिटी से Library Science की शिक्षा ले रहे थे। उसी दौरान भारत-चीन युद्ध भी अपने चरम पे था। तभी कल्याणसुन्दरम जी ने रेडियो पर पंडित जवाहरलाल नेहरु का सन्देश सुना जिसमे इ देशवासियों से डिफेंस फण्ड में अपना योगदान देने की अपील कर रहे थे।

कल्याणसुन्दरम जी के इस काम की लोकल न्यूज़ पेपर्स में काफी प्रसंशा हुई और खुद मुख्य मंत्री उनके इस कदम से इतने प्रभावित हुए की 1963 में May Day के दिन उन्हें सम्मानित किया।

कल्याणसुन्दरम जी चाहते थे कि उनकी गोल्ड चेन डोनेट करने की बात उस समय की पॉपुलर मैगज़ीन आनंद विकाटन में छपे, ताकि और लोग भी प्रेरित हो डिफेंस फण्ड में अपन योगदान दें। लेकिन मैगज़ीन के एडिटर एस. बाला सुब्रमणियन ने इसे एक पब्लिसिटी स्टंट समझा और कल्याणसुन्दरम जी को अगले पांच साल में अपनी sincerity साबित करने को कहा।

पढाई के बाद उनकी नौकरी Kumarkurupara Arts College at Srivaikuntam, में बतौर लाइब्रेरियन लग गयी, जहाँ उन्होंने 35 साल तक काम किया। शुरू के कुछ सालों में वो अपनी कमाई का एक छोटा हिस्सा ही दान में देते थे लेकिन जल्द ही वे अपनी पूरी कमाई ही दान में देने लगे और अपना खर्चा चलाने के लिए छोटे-मोटे काम करने लगे।

पालम कल्याणसुन्दरम कहते हैं, “ये समझने के लिए की गरीब होना कैसा होता है मैं फुटपाथों  पे और रेलवे प्लेटफार्मस पर  सोया हूँ, सर पर बिना किसी छत के।”

कई बार कल्याणसुन्दरम जी को ऐसा करते उनके स्टूडेंट्स देख लेते और बाद में उनसे आ कर  कहते की हमने आज प्लेटफार्म पर आपके एक डुप्लीकेट देखा…बिलकुल आपकी तरह! और कल्याणसुन्दरम जी ये सुनकर मुस्कुरा देते।

उनका कहना है,  “मैं एक बैचलर हूँ और मेरी पर्सनल ज़रूरतें बहुत कम हैं। मैं होटल और लांड्री वगैरह में छोटे-मोटे काम करके अपना खर्चा चला लेता हूँ। मैं…बस किसी चीज पर अपना अधिकार नहीं चाहता। Actually, मेरे जीवन का सबसे सुखद पलों में से एक वो पल था जब मुझे एक अमेरिकी आर्गेनाइजेशन ने “Man of the Millennium” चुना और मैंने इनाम में मिले 30 करोड़ रुपये चैरिटी में दे दिए। इसलिए, सबकुछ एक state of mind है। अंत में जब हम दुनिया छोड़ कर जाते हैं तो अपने साथ क्या ले जाते हैं?”

कल्याणसुन्दरम जी का मानना है कि हर किसी को अपने चुने हुए क्षेत्र में कुह अचीव करना चाहिए। लाइब्रेरी साइंस में उनका बहुत बड़ा योगदान है। लाइब्रेरी में किस प्रकार किताबों को ट्रेस और एक्सेस किया जाए, इसके लिए उहोने एक सरल तरीका इजात किया है। काम के प्रति उनकी लगन की वजह से वे इस क्षेत्र में भी बड़े सम्मान प्रपात कर चुके हैं।

70 से अधिक उम्र का होने के बावजूद कल्याणसुन्दरम जी को बच्चे और युवाओं के साथ घनिष्टता बनाने में समय नहीं लगता। वो एक घटना बताते हैं जब उन्होंने खादी पहनना शुरू किया।

कल्याणसुन्दरम जी चुपचाप अपना काम किये जा रहे थे और उन्होंने कभी इस बात को हाईलाइट करने की कोशिश नहींकी। जब 1990 में उन्हें UGC से बतौर arrear 1 लाख रुपया मिला तो हमेशा की तरह  उन्होंने उसे भी दान करने का निश्चय किया। वे District Collector के पास गए और अनाथ बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए ये पैसे charity में दे दिए।

उनके ना चाहते हुए भी कलेक्टर ने ये बात मीडिया को बता दी और इस माहन आदमी की कहानी पूरी दुनिया के सामने आ गयी। जिसके बाद उन्हें देश-विदेश हर जगह से सम्मानित किये जाने का सिलसिला शुरू हो गया।

जब सुपरस्टार रजनीकांत, जो खुद बहुत से सामजिक कार्य किया करते हैं, को उनके बारे में पता चला तो उनका माथा भी इस व्यक्ति के सम्मान में झुक गया और उन्होंने कल्याणसुन्दरम को अपने पिता के रूप में adopt कर लिया।

रजनीकांत उन्हें अपने घर ले जाकर साथ रखना चाहते थे, पर कल्याणसुन्दरम जी तो अपने छोटे से कमरे में ही खुश थे और उन्होंने उनका ये आग्रह अस्वीकार कर दिया।

कल्याणसुन्दरम जी जब तक नौकरी में रहे वे मुख्यतः बच्चों के वेलफेयर के लिए काम करते रहे। लेकिन 1998 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने और लोगों की भी सेवा करने का सोचा और इस तरह उनकी संस्था पालम का जन्म हुआ।

कल्याणसुन्दरम जी ने पालम बनाने के बाद जो सबसे पहला काम किया वो था उन्हें रिटायरमेंट पर मिलने वाला 10 लाख रुपया समाज सेवा में लगाना। उन्होंने ये सारा पैसा Collector’s Fund में जमा करा दिया और वो आज भी हर महीने वाली पेंशन भी समाज सेवा में लगा देते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि वे अपनी पैत्रिक संपत्ति भी दान में दे चुके हैं।

आज उनकी संस्था donors और beneficiaries के बीच में एक लिंक का काम करती है और बच्चों की शिक्षा, बीमार लोगों का ईलाज, विकलांग लोगों की मदद और किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से प्रभावित हुए लोगों को रिलीफ पहुंचाने में  अग्रसर है ।

कल्याणसुन्दरम जी पैसों से बिलकुल भी आकर्षित नहीं होते। उनका कहना है, “ कोई व्यक्ति तीन तरह से पैसे पा सकता है। पहला, खुद कमा के, दूसरा पेरेंट्स की कमाई से और तीसरा किसी से दान में पैसे पाकर। लेकिन अपने कमाए पैसों को डोनेट करने से ज्यादा सुखद और संतोषजनक कुछ भी नहीं है।”

 

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दशरथ मांझी

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” माउंटेन मैन” दशरथ मांझी

दशरथ मांझी जो बिहार में गया के करीब गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे। उन्होनें केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली। 22 वर्षों के परीश्रम के बाद, दशरथ की बनायी सड़क ने अतरी और वजीरगंज ब्लाक की दूरी को 55 किलोमीटर से 15 किलोमीटर कर दिया।

 

दशरथ मांझी काफी कम उम्र में अपने घर से भाग गए थे और धनबाद की कोयले की खानों में उन्होनें काम किया। फिर वे अपने घर लौट आए और फाल्गुनी देवी / Falguni Devi से शादी की। अपने पति के लिए खाना ले जाते समय उनकी पत्नी फाल्गुनी पहाड़ के दर्रे में गिर गयी और उनका निधन हो गया। अगर फाल्गुनी देवी को अस्पताल ले जाया गया होता तो शायद वो बच जाती यह बात उनके मन में घर कर गई। इसके बाद दशरथ मांझी ने संकल्प लिया कि वह अकेले अपने दम पर वे पहाड़ के बीचों बीच से रास्ता निकालेगे और फिर उन्होंने 360 फ़ुट-लम्बा (110 मी), 25 फ़ुट-गहरा (7.6 मी) 30 फ़ुट-चौड़ा (9.1 मी)गेहलौर की पहाड़ियों से रास्ता बनाना शुरू किया। इन्होंने बताया, “जब मैंने पहाड़ी तोड़ना शुरू किया तो लोगों ने मुझे पागल कहा लेकिन इस बात ने मेरे निश्चय को और भी मजबूत किया। ”

उन्होंने अपने काम को 22 वर्षों (1960-1982) में पूरा किया। इस सड़क ने गया के अत्रि और वज़ीरगंज सेक्टर्स की दूरी को 55 किमी से 15 किमी कर दिया। माँझी के प्रयास का मज़ाक उड़ाया गया पर उनके इस प्रयास ने गेहलौर के लोगों के जीवन को सरल बना दिया। हालांकि उन्होंने एक सुरक्षित पहाड़ को काटा, जो भारतीय वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम अनुसार दंडनीय है फिर भी उनका ये प्रयास सराहनीय है। बाद में मांझी ने कहा,” पहले-पहले गाँव वालों ने मुझपर ताने कसे लेकिन उनमें से कुछ ने मुझे खाना दीया और औज़ार खरीदने में मेरी सहायता भी की।”

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) के कैंसर से पीड़ित मांझी का 73 साल की उम्र में, 17 अगस्त 2007 को निधन हो गया। बिहार की राज्य सरकार के द्वारा उनका अंतिम संस्कार किया गया।

मांझी ‘माउंटेन मैन’ / Manjhi The Mountain Man के रूप में विख्यात हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए बिहार सरकार ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 2006 में पद्म श्री हेतु उनके नाम का प्रस्ताव रखा।

हरकचंद सावला

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करीब तीस साल का एक युवक मुंबई के प्रसिद्ध टाटा कैंसर अस्पताल के सामने फुटपाथ पर खड़ा था।

युवक वहां अस्पताल की सीढिय़ों पर मौत के द्वार पर खड़े मरीजों को बड़े ध्यान दे देख रहा था,

जिनके चेहरों पर दर्द और विवषता का भाव स्पष्ट नजर आ रहा था।

इन रोगियों के साथ उनके रिश्तेदार भी परेशान थे।

थोड़ी देर में ही यह दृष्य युवक को परेशान करने लगा।

वहां मौजूद रोगियों में से अधिकांश दूर दराज के गांवों के थे, जिन्हे यह भी नहीं पता था कि क्या करें, किससे मिले? इन लोगों के पास दवा और भोजन के भी पैसे नहीं थे।

टाटा कैंसर अस्पताल के सामने का यह दृश्य देख कर वह तीस साल का युवक भारी मन से घर लौट आया।

उसने यह ठान लिया कि इनके लिए कुछ करूंगा। कुछ करने की चाह ने उसे रात-दिन सोने नहीं दिया। अंतत: उसे एक रास्ता सूझा..

उस युवक ने अपने होटल को किराये पर देक्रर कुछ पैसा उठाया। उसने इन पैसों से ठीक टाटा कैंसर अस्पताल के सामने एक भवन लेकर धर्मार्थ कार्य (चेरिटी वर्क) शुरू कर दिया।

उसकी यह गतिविधि अब 27 साल पूरे कर चुकी है और नित रोज प्रगति कर रही है। उक्त चेरिटेबिल संस्था कैंसर रोगियों और उनके रिश्तेदारों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराती है।

करीब पचास लोगों से शुरू किए गए इस कार्य में संख्या लगातार बढ़ती गई। मरीजों की संख्या बढऩे पर मदद के लिए हाथ भी बढऩे लगे। सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम को झेलने के बावजूद यह काम नहीं रूका।

यह पुनीत काम करने वाले युवक का नाम था हरकचंद सावला।

एक काम में सफलता मिलने के बाद हरकचंद सावला जरूरतमंदों को निशुल्क दवा की आपूर्ति शुरू कर दिए।

इसके लिए उन्होंने मैडीसिन बैंक बनाया है, जिसमें तीन डॉक्टर और तीन फार्मासिस्ट स्वैच्छिक सेवा देते हैं। इतना ही नहीं कैंसर पीडि़त बच्चों के लिए खिलौनों का एक बैंक भी खोल दिया गया है। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि सावला द्वारा कैंसर पीडि़तों के लिए स्थापित ‘जीवन ज्योत ट्रस्ट ‘ आज 60 से अधिक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।

57 साल की उम्र में भी सावला के उत्साह और ऊर्जा 27 साल पहले जैसी ही है।

मानवता के लिए उनके योगदान को नमन करने की जरूरत है।

यह विडंबना ही है कि आज लोग 20 साल में 200 टेस्ट मैच खेलने वाले सचिन को कुछ शतक और तीस हजार रन बनाने के लिए भगवान के रूप में देखते हैं।

जबकि 10 से 12 लाख कैंसर रोगियों को मुफ्त भोजन कराने वाले को कोई जानता तक नहीं।

यहां मीडिया की भी भूमिका पर सवाल है, जो सावला जैसे लोगों को नजर अंदाज करती है।

यहां यह भी बता दे कि गूगल के पास सावला की एक तस्वीर तक नहीं है।

यह हमे समझना होगा कि पंढरपुर, शिरडी में साई मंदिर, तिरुपति बाला जी आदि स्थानों पर लाखों रुपये दान करने से भगवान नहीं मिलेगा।

भगवान हमारे आसपास ही रहता है। लेकिन हम बापू, महाराज या बाबा के रूप में विभिन्न स्टाइल देव पुरुष के पीछे पागलों की तरह चल रहे हैं।

इसके बाजवूद जीवन में कठिनाइयां कम नहीं हो रही हैं और मृत्यु तक यह बनी रहेगी।

परतुं बीते 27 साल से कैंसर रोगियों और उनके रिश्तेदारों को हरकचंद सावला के रूप में भगवान ही मिल गया है।

विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र

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विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र
(कोई माने या ना माने)
■ क्रति = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग
■ 1 त्रुति = सैकन्ड का 300 वाँ भाग
■ 2 त्रुति = 1 लव ,
■ 1 लव = 1 क्षण
■ 30 क्षण = 1 विपल ,
■ 60 विपल = 1 पल
■ 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ) ,
■ 2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा )
■ 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार) ,
■ 7 दिवस = 1 सप्ताह
■ 4 सप्ताह = 1 माह ,
■ 2 माह = 1 ऋतू
■ 6 ऋतू = 1 वर्ष ,
■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी
■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी ,
■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग
■ 2 युग = 1 द्वापर युग ,
■ 3 युग = 1 त्रैता युग ,
■ 4 युग = सतयुग
■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग
■ 76 महायुग = मनवन्तर ,
■ 1000 महायुग = 1 कल्प
■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ )
■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म )
■ महाकाल = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म )
सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यही है। जो हमारे देश भारत में
बना। ये हमारा भारत जिस पर हमको गर्व है l

शूरवीर हिंदूओ के 11 महान सत्य

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शूरवीर हिंदूओ के 11 महान सत्य

🔘 1. चित्तौड़ के जयमाल मेड़तिया ने एक ही झटके में हाथी का सिर काट डाला था ।

🔘 2. करौली के जादोन राजा अपने सिंहासन पर बैठते वक़्त अपने दोनो हाथ जिन्दा शेरों पर रखते थे ।

🔘 3. जोधपुर के जसवंत सिंह के 12 साल के पुत्र पृथ्वी सिंह ने हाथोँ से औरंगजेब के खूंखार भूखे जंगली शेर का जबड़ा फाड़ डाला था ।

🔘 4. राणा सांगा के शरीर पर युद्धोंके छोटे-बड़े 80 घाव थे। युद्धों में घायल होने के कारण उनके एक हाथ नहीं था, एक पैर नही था, एक आँख नहीं थी। उन्होंने अपने जीवन-काल में 100 से भी अधिक युद्ध लड़े थे ।

🔘 5. एक राजपूत वीर जुंझार जो मुगलों से लड़ते वक्त शीश कटने के बाद भी घंटे तक लड़ते रहे आज उनका सिर बाड़मेर में है, जहाँ छोटा मंदिर हैं और धड़ पाकिस्तान में है।

🔘 6. रायमलोत कल्ला का धड़, शीश कटने के बाद लड़ता-लड़ता घोड़े पर पत्नी रानी के पास पहुंच गया था तब रानी ने गंगाजल के छींटे डाले तब धड़ शांत हुआ।

🔘 7. चित्तौड़ में अकबर से हुए युद्ध में जयमाल राठौड़ पैर जख्मी होने की वजह से कल्ला जी के कंधे पर बैठ कर युद्ध लड़े थे। ये देखकर सभी युद्ध-रत साथियों को चतुर्भुज भगवान की याद आ गयी थी, जंग में दोनों के सर काटने के बाद भी धड़ लड़ते रहे और राजपूतों की फौज ने दुश्मन को मार गिराया। अंत में अकबर ने उनकी वीरता से प्रभावित हो कर जयमाल और कल्ला जी की मूर्तियाँ आगरा के किले में लगवायी थी।

🔘 8. राजस्थान पाली में आउवा के ठाकुर खुशाल सिंह 1877 में अजमेर जा कर अंग्रेज अफसर का सर काट कर ले आये थे और उसका सर अपने किले के बाहर लटकाया था, तब से आज दिन तक उनकी याद में मेला लगता है।

🔘 9. महाराणा प्रताप के भाले का वजन सवा मन (लगभग 50 किलो ) था, कवच का वजन 80 किलो था। कवच, भाला, ढाल और हाथ में तलवार का वजन मिलाये तो लगभग 200 किलो था। उन्होंने तलवार के एक ही वार से बख्तावर खलजी को टोपे, कवच, घोड़े सहित एक ही झटके में काट दिया था।

🔘 10. सलूम्बर के नवविवाहित रावत रतन सिंह चुण्डावत जी ने युद्ध जाते समय मोह-वश अपनी पत्नी हाड़ा रानी की कोई निशानी मांगी तो रानी ने सोचा ठाकुर युद्ध में मेरे मोह के कारण नही लड़ेंगे तब रानी ने निशानी के तौर पर अपना सर काट के दे दिया था। अपनी पत्नी का कटा शीश गले में लटका कर मुग़ल सेना के साथ भयंकर युद्ध किया और वीरता पूर्वक लड़ते हुए अपनी मातृ भूमि के लिए शहीद हो गये थे।

🔘 11. हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक थे। फिर भी अकबर की मुगल सेना पर राजपूत भारी पड़े थे।

धन्य थे वो हिन्दुस्तान के वीर हमें अपने हिंदू होने पर गर्व है

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