मदुरै के नारायण कृष्णन एक अवार्ड विनिंग शेफ हैं जो फाइव स्टार होटल में मोटी सैलरी पर काम किया करते थे. लेकिन एक दिन उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि उन्होंने अपनी लाखों की नौकरी छोड़ दी और गरीबों की मदद करने में जुट गया.

नारायणन के मुताबिक वो साल 2002 में मदुरै शहर के एक मंदिर में गए थे, जहां उनकी नजर एक ऐसे बुजुर्ग शख्स पर पड़ी जो दयनीय हालत में पुल के नीचे बैठा था और कूड़े में खाना ढूंढ रहा था. इस नजारे को देखकर नारायणन को बड़ा झटका लगा और महज एक हफ्ते में नौकरी छोड़कर वो वापस घर लौट आए.

नारायणन को अपनी इस मुहिम के लिए एक वैन दान में मिली है जो हर रोज 125 मील का सफर तय करती है और करीब 400 लोगों को खाना खिलाया जाता है. नारायणन खुद अपने हाथों से इन लोगों के लिए खाना बनाते हैं. इतना ही नहीं अगर भूखा शख्स ज्यादा कमजोर हो तो उसे वो अपने हाथ से खाना भी खिलाते हैं.

इस काम के लिए नारायणन को हर रोज करीब 15 हजार रुपये की जरूरत होती है. जबकि उनके पास जो दान में रकम आती है उससे केवल 22 दिन का ही खर्च चल पाता है.

इस मुहिम को चलाने के लिए नारायणन को पैसों की कमी का सामना करना पड़ता है लेकिन अपनी नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें गरीबों को हर रोज अपने हाथ से बना खाना खिलाने में बड़ा मज़ा आता है

 

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